Accuracy and Precision in Hindi | यथार्थता  एवं परिशुद्धता

Accuracy and Precision | यथार्थता  एवं परिशुद्धता

सामान्य शब्दों में Accuracy and Precision (एक्युरेसी तथा प्रिसिज़न) में अन्तर स्पष्ट करना कठिन है, क्योंकि जहाँ तक शब्दों के अर्थ का प्रश्न है इन दोनों का अर्थ लगभग एक समान है। परन्तु मापन प्रक्रिया (measurement process) में Accuracy and Precision पूर्णतया अलग-अलग शब्द हैं एवं उनकी अलग-अलग परिभाषायें हैं। Click here to read this article in English

यथार्थता (Accuracy)

यथार्थता,मापन यन्त्र का वह गुण है जो उसके द्वारा किसी राशि के मापे गये मान तथा राशि के सत्य मान (true value) में निकटता (closeness) दर्शाता है, अर्थात्-यन्त्र द्वारा मापा गया मान, सत्य मान के जितना अधिक समीप (close) होगा, यन्त्र उतना ही अधिक यथार्थ (accurate) होगा एवं उसकी यथार्थता (accuracy) भी उतनी ही अधिक उच्च होगी । इस प्रकार, यथार्थता सत्य के साथ निकटता (conformity) प्रदर्शित करती है।

एक्युरेसी (accuracy) को विभिन्न विधियों द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। उदाहरणतः इसे हम मापन में हुई त्रुटि की सीमा (limits of error in measurement or inaccuracy) द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।

एक्युरेसी को, प्वाइन्ट एक्युरेसी (point accuracy) में, यन्त्र के स्केल की सीमा के प्रतिशत (percentage of scale range) में अथवा मापी गयी राशि के सत्य मान के प्रतिशत (percentage of true value of quantity) में प्रदर्शित कर सकते हैं-

1. प्वाइन्ट एक्युरेसी | Point Accuracy

यह यन्त्र की, स्केल के किसी एक बिन्दु पर एक्युरेसी है। यह एक्युरेसी, स्केल के किसी अन्य बिन्दु पर मापन की एक्युरेसी के सम्बन्ध में सूचना नहीं देती। प्वाइन्ट एक्युरेसी से यन्त्र की सामान्य एक्युरेसी (general accuracy) के बारे में भी कोई सूचना नहीं प्राप्त होती । यन्त्र की सामान्य एक्युरेसी ज्ञात करने के लिये सम्पूर्ण स्केल के विभिन्न बिन्दुओं पर एक्युरेसी की तालिका बनायी जा सकती है।

2. स्केल की सीमा के प्रतिशत के रूप में एक्युरेसी | Accuracy in terms of percentage of scale range

यदि मापन यन्त्र का स्केल यूनिफॉर्म है तब उसकी एक्युरेसी स्केल की रेंज के पदों में प्रदर्शित की जा सकती है। उदाहरणतः किसी ओम मीटर (Ohm meter), जिसके स्केल की रेंज 1Kilo ohm है, की एक्युरेसी स्केल रेंज की ± 0.01 प्रतिशत द्वारा दर्शायी जा सकती है। इसका अर्थ है जब ओम मीटर की रीडिंग 1000 ohm है तब इसकी एक्युरेसी ±0.1% है जो नगण्य है। परन्तु जब मीटर की रीडिंग 100 ohm है तब इसमें त्रुटि (1000/100) x (0.01) = 1% है जो काफी अधिक है। इस प्रकार, यन्त्र की स्केल रेंज के प्रतिशत के रूप में एक्युरेसी, भ्रामक (misguiding) हो सकती है।

3. सत्य मान के प्रतिशत के रूप में एक्युरेसी | Accuracy in terms of percentage of True Value

एक्युरेसी का सर्वाधिक उपयुक्त विवरण, मापी जाने वाली राशि के सत्य मान (true (value) के प्रतिशत के रूप में दिया जाता है। उदाहरणतः राशि के सत्य मान के ±0.01%, ±0.02% अथवा ±0.05% इत्यादि के अन्तर्गत। इस कथन का अर्थ है कि पाठ्यांक (reading) कम होने पर त्रुटि भी कम होगी।

परिशुद्धता | Precision

परिशुद्धता मापन यन्त्रों का वह गुण है जिसके कारण, यन्त्र किसी माप को बारम्बार मापने पर एक समान पुनरुत्पादित (reproduce) करता है। प्रिसाइज़ (precise) का अर्थ है स्पष्ट (clear) अथवा ‘sharply defined’ । यथार्थता (accuracy) एवं परिशुद्धता (precision) में अन्तर स्पष्ट करने के लिये एक उदाहरण पर विचार करें। माना एक वोल्टमीटर अपनी संरचना के कारण अत्यन्त परिशुद्ध है क्योंकि उसका स्केल, सूक्ष्म पाठ्यांकों को प्रदर्शित करने के लिये उत्तम रूप से विभाजित (finely divided) है, उसका स्केल अत्यन्त स्पष्ट (distinct) है तथा उसमें पैरेलेक्स (parallax) दूर करने के लिये नाइफ-एज प्वाइन्टर (knife-edge pointer ) के साथ एक दर्पण लगा है। माना इस वोल्टमीटर से 1/100 वोल्ट तक रीडिंग ली जा सकती है। इन सभी गुणों के साथ माना उसका जीरो-एडजस्टमैन्ट त्रुटिपूर्ण (wrong) है। इस वोल्टमीटर से जब भी हम कोई रीडिंग लेंगे, यह सदा एक समान ही शुद्ध होगा। इस वोल्टमीटर से न्यूनतम 1/100 वोल्ट तक रीडिंग ली जा सकती है तथा प्रत्येक रीडिंग स्पष्ट (sharply defined) होगी। यद्यपि इस वोल्टमीटर से ली गयी रीडिंग यथार्थ (accurate) नहीं होगी क्योंकि इसमें जीरो – एडजस्टमैन्ट त्रुटिपूर्ण होने के कारण, पाठ्यांक सत्य (true) नहीं होंगे।

एक अन्य उदाहरण पर विचार कीजिये। माना एक 100V की ज्ञात वोल्टेज किसी वोल्टमीटर से मापते हैं तथा वोल्टमीटर 104, 103, 105, 103 तथा 105V रीडिंग दर्शाता है। इन पाठ्यांकों से स्पष्ट है कि वोल्टमीटर 5% से अधिक यथार्थता (accuracy) के लिये विश्वसनीय (reliable) नहीं है जबकि परिशुद्धता (precision) की दृष्टि से यह ± 1% परिशुद्ध (precise) है क्योंकि उसके द्वारा प्रदर्शित विभिन्न मान एवं उनके औसत 104 वोल्ट में केवल 1 वोल्ट का अन्तर है (105-104 = 1V तथा 104 – 103 = 1V)। इस प्रकार है इस वोल्टमीटर को ±1V तक शुद्ध मापन के लिये कैलीब्रेट (calibrate) किया जा सकता है । इस उदाहरण से स्पष्ट है कि कैलीब्रेशन द्वारा यन्त्र की यथार्थता में सुधार किया जा सकता हैं परन्तु परिशुद्धता में नहीं। इन पाठ्यांकों से यह भी स्पष्ट है कि यदि सभी पाठ्यांक लगभग बराबर (close) हैं परन्तु उनमें कुछ फैलाव (scattering) है (103V से 105 तक), तब यह वोल्टमीटर परिशुद्धता की दृष्टि से तो उत्तम है परन्तु यथार्थ (accurate) नहीं है।

इस प्रकार जब हम कहते हैं कि किसी यन्त्र द्वारा लिये गये पाठ्यांक परिशुद्ध (precise) हैं तब इसका अर्थ कि यन्त्र द्वारा प्रदर्शित परिणाम, परस्पर सामंजस्य (agreement) रखते हैं। यद्यपि ‘agreement’ होने से यथार्थता (accuracy) की कोई गारन्टी नहीं है।

परिशुद्धता के अभिलक्षण | Indications of Precision

मापन की परिशुद्धता के दो मुख्य अभिलक्षण हैं-

1. परिणाम की अनुरूपता (Conformity of results)

2. सार्थक अंक (Significant figures)

1. परिणाम की अनुरूपता (Conformity)

अनुरूपता (conformity) का अर्थ है, किसी राशि को बार-बार मापने पर एक ही मान प्राप्त होना। इसे मापन की ‘consistency’ भी कहते हैं। यदि यन्त्र द्वारा प्राप्त परिणाम, स्केल पर एक अत्यन्त छोटे भाग (tight cluster) में ही सीमित रहते हैं तब यन्त्र की परिशुद्धता उच्च (high precision) होती है। जबकि निम्न परिशुद्धता वाले यन्त्र में एक ही राशि को बारम्बार मापने पर मापन स्केल पर अपेक्षाकृत बड़े भाग में (broad scattered) सीमित होते। हैं। परन्तु उच्च परिशुद्धता का अर्थ यह नहीं है कि यन्त्र की यथार्थता भी उच्च ही होगी। क्योंकि प्रत्येक माप, यन्त्र के किसी दोष से समान रूप से प्रभावित होती है जिससे पाठ्यांक (readings) सत्य मान से समान रूप से विचलित होते हैं।

परिशुद्धता (precision) को एक अन्य उदाहरण द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है। माना एक प्रतिरोध, जिसका सत्य मान 1,485,6925ohm है, एक ओम मीटर द्वारा मापा जाता है। ओममीटर, प्रतिरोध को मापने पर उसका सही मान (1,485,6925ohm) प्रदर्शित करता है परन्तु हम मीटर में उसका सही मान पढ़ने में असमर्थ रहते हैं। मीटर में हम उसका मान 1.5 mega ohm पढ़ते हैं। यह सत्य मान के उतना ही निकट है जितना हम पैमाने को अधिक से अधिक ठीक पढ़ सकते हैं। यद्यपि स्केल को बार-बार पढ़ने पर हमें यही मान प्राप्त होता है परन्तु यह सत्य नहीं है। इस प्रेक्षण में त्रुटि स्केल द्वारा सीमित होती है। यह त्रुटि परिशुद्धता की कमी के कारण (precision error) है।

2. सार्थक अंकों की संख्या (Number of Significant Figures)

यन्त्रों की परिशुद्धता इस के द्वारा दिखाये गये मान में सार्थक अंकों की संख्या पर भी निर्भर करती है क्योंकि सार्थक अंक, मापन के आयाम एवं मापन की परिशुद्धता प्रदर्शित करते हैं। सार्थक अंकों की संख्या जितनी अधिक होती है, मापन की परिशुद्धता भी उतनी ही उच्च होती है। उदाहरणतः यदि किसी वोल्टेज को 12V पर निर्धारित किया जाता है तब इसके मान 12V के अधिक से अधिक समीप लेना चाहिये, न कि 11V अथवा 13V के समीप । यदि वोल्टेज 12.0V है तब इसका अर्थ है कि यह 12.1V अथवा 11.9V की तुलना में 12V के अधिक समीप है। 12V में सार्थक अंकों की संख्या 2 है जबकि 12.0V में सार्थक अंकों की संख्या 3 है। अतः अधिक सार्थक अंकों वाली संख्या (12.0) कम सार्थक वाली पहली संख्या (12V) की तुलना में अधिक परिशुद्धता प्रदर्शित करती है।

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